'आनंद दिघे के साथ जो हुआ वह रोशनी शिंदे के साथ न हो', उद्धव ठाकरे के अस्पताल जाने पर क्यों उठे सवाल, जानिए
मुंबई: गुट की महिला कार्यकर्ता रोशनी शिंदे के साथ हुई मारपीट के मामले में एक नया ट्विस्ट सामने आया है। इस मामले की वजह से 22 साल बाद एक बार फिर 'ठाणे जिले के ठाकरे' कहे जाने वाले दिवंगत की मौत पर सवाल उठाये गए हैं। ठाणे जिले की ने यह सवाल उठाया है। मीनाक्षी शिंदे ने कहा कि जब आनंद दिघे अस्पताल में भर्ती थे तब उद्धव ठाकरे उनसे मिलने आये थे। उद्धव ठाकरे के अस्पताल से जाने के आधे घंटे बाद आनंद दिघे की मौत हो गई। इतना ही नहीं आनंद दिघे की अंतिम यात्रा में ठाकरे परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ था। मीनाक्षी ने आगे कहा, 'मुझे डर है कि जो कुछ आनंद दिघे के साथ हुआ वैसा रोशनी शिंदे के साथ न जाए। इसलिए मेरी मांग है कि रोशनी शिंदे को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।' इस मुद्दे पर आनंद दिघे के भतीजे और ठाकरे गुट के नेता केदार दिघे ने कहा कि यह सब स्वार्थी राजनीति के लिए शिंदे गुट की तरफ से किया जा रहा है। केदार दिघे ने कहा कि तब आनंद दिघे को देखने के लिए सिर्फ उद्धव ठाकरे ही नहीं आये थे बल्कि तब राज ठाकरे, नारायण राणे समेत कई स्थानीय नेता भी आये थे। खुद मौजूदा मुख्यमंत्री भी तब आये थे। पूर्व मेयर मीनाक्षी शिंदे ने यह सवाल भी उठाया है कि आखिर क्या हुआ था उस आधे घंटे में? इसे लेकर ठाणेकरों के मन में कई सवाल हैं। जिसका खुलासा होना चाहिए। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अब तक नहीं मिली है।मन में क्यों हुआ ऐसा संदेह?मीनाक्षी शिंदे ने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से इस मुद्दे पर बातचीत की। उन्होंने कहा, यह सवाल मैंने इसलिए उठाया क्योंकि 22 साल पहले उद्धव ठाकरे से आनंद दिघे से अस्पताल में मिले थे। उसके आधे घंटे बाद ही उनकी (दिघे की) मौत हो गयी थी। रोशनी शिंदे से भी उद्धव ठाकरे ने अस्पताल मुलाकात की थी। उसके बाद रोशनी को बिना किसी बीमारी के लीलावती अस्पताल में शिफ्ट किया गया। इसी वजह से मैंने यह सवाल उठाया और रोशनी के लिए सुरक्षा की मांग की थी। मीनाक्षी शिंदे ने कहा कि मेरी जानकारी में रोशनी शिंदे को शुक्रवार के दिन डिस्चार्ज कर दिया गया है। ठाणे के ठाकरे बने आनंद दिघे यूं तो शिवसेना के प्रमुख दिवंगत बालसाहेब ठाकरे थे लेकिन मुंबई से सटे ठाणे जिले में दिवंगत आनंद दिघे को ठाणे का ठाकरे कहा जाता था। दरअसल आनंद दिघे का कद इतना बड़ा था कि उन्हें लोग ठाणे का ठाकरे कहते थे। आलम यह था कि बाला साहेब ठाकरे के बाद उन्हें शिवसेना का सबसे कद्दावार और दबंग नेता कहा जाता था। 27 जनवरी 1951 को जन्मे दिघे पर शिवसेना के कार्यकर्ता की हत्या का आरोप लगा था। इसकी वजह से वे शिवसेना से नाराज भी थे। बाद में उन्होंने कई मौकों पर कांग्रेस का साथ दिया। उन्हें टाडा के तहत भी गिरफ्तार किया गया था। बाद में जमानत पर रिहा हुए।साल 2001 के अगस्त महीने में आनंद दिघे एक कार एक्सीडेंट में घायल हो गये थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी थी। जिसपर शिवसेना ने आरोप लगाया था कि इलाज में लापरवाही के कारण उनकी मौत हुई। इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने पूरे अस्पताल को आग के हवाले कर दिया था।
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