देश में कोरोना के कुल मामलों का 12% दिल्ली में, 186 पॉजिटिव में से एक में भी कोरोना के लक्षण नहीं
कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शनिवार को 734 मामले की टेस्ट रिपोर्ट आई। इसमें 186 कोरोना के मरीज निकले। यानी 25 प्रतिशत कोरोना के मरीज हैं। इनमें किसी में भी कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं। यानी किसी को बुखार, सांस लेने में दिक्कत, सर्दी-जुकाम या अन्य किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को ऑनलाइन प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। केजरीवाल ने कहा कि यह बहुत खतरनाक है। लोग कोरोना लेकर घूम रहे हैं। उनको पता ही नहीं है कि उनको कोराना है।
सीएम ने बताया एक व्यक्ति दिल्ली सरकार के फूड सेंटर पर खाना बांटने का काम कर रहा था। उस फूड सेंटर में आने वाले सभी लोगों के रैपिड टेस्टिंग करने के आदेश दिए गए हैं। सरकार फूड सेंटर पर खाना बांटने वाले सभी कर्मचारियों और स्वयंसेवकों का रैपिड टेस्ट भी कराएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की कुल आबादी का करीब 2 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली में रहता है, लेकिन देश में कोरोना के कुल मामलों का 12 प्रतिशत दिल्ली में हैं। विदेशों से लोग सीधे दिल्ली आते हैं इसलिए सबसे ज्यादा मार दिल्ली को बर्दाश्त करनी पड़ी। मरकज के मामले में भी जो हुआ उसकी मार भी दिल्ली को बर्दाश्त करनी पड़ी।
फैल रहा है कोरोना, रोज कंटनेमेंट जोन बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में: केजरीवाल
सीएम ने कहा कि दिल्ली में कोरोना फैलना शुरू हो गया है। रोज कंटनेमेंट जोन बढ़ते जा रहे हैं। अब तक दिल्ली में 79 जोन हो गए हैं। फिर भी स्थिति नियंत्रण में है। केजरीवाल ने कहा कि कंटनेमेंट जोन में जहां लोगों ने सरकार के आदेश का पालन किया वहां पर कोई नया केस नहीं आया, लेकिन आदेश का पालन नहीं करने वाले जोन में नए मामले सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में कोरोना तेजी से फैल रहा है लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। स्थिति चिंताजनक है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। यदि 3000 लोगों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है, दो-ढाई हजार लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती तो इतने तो हमारे पास हैं। उन्होंने कहा कि 1893 मामले दिल्ली में हैं। 26 मरीज आईसीयू में, 6 वेंटीलेटर पर हैं।
अभी कोई छूट नहीं, आगे का फैसला 27 अप्रैल को दिल्ली सरकार समीक्षा बैठक में करेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में 11 जिले हैं। इनमें से 11 के 11 जिले हाॅटस्पॉट घोषित हैं। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, कंटनेमेंट जोन में फिलहाल कोई छूट नहीं दी जाना चाहिए। दिल्ली में लॉकडाउन की शर्तों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। 27 अप्रैल को दिल्ली सरकार समीक्षा बैठक करेगी। जिसमें तब की स्थिति को देखते हुए फैसला लिया जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि हम लोगों की मुश्किलों से परिचित हैं, लेकिन लोगों के भले के लिए ही निर्णय लिया है। सीएम ने कहा कि यदि ढील दी और स्थिति खराब हुई तो खुद को माफ नहीं कर पाएंगे। इधर, मुख्य सचिव और दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की स्टेट एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन विजय देव ने आदेश जारी कर दिए।
दहशत:सफदरजंग अस्पताल में दो और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर में कोरोना संक्रमण, शनिवार को डेढ़ महीने के बच्चे की मौत हो गई थी
राजधानी दिल्ली में कोरोना का संक्रमण स्वास्थ्यकर्मियों के खतरा बनता जा रहा है। रविवार को केंद्र सरकार के दो अस्पताल सफदरजंग और लेडी हार्डिंग में तीन डॉक्टर में कोरोना की पुष्टि हुई। डॉक्टर के अलावा लेडी हार्डिंग में दो नर्सों में भी कोरोना की पुष्टि हुई है। मेडिकल कॉलेज के कलावती सरन अस्पताल में शनिवार को एक डेढ़ महीने की बच्चे की भी मौत हुई थी। जानकारी के मुताबिक लेडी हॉर्डिंग मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में रविवार को एक डॉक्टर और दो अन्य नर्स कर्मचारियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई।
अस्पताल में अब तक तीन डॉक्टर समेत 11 स्वास्थ्यकर्मी कोरोना को चपेट में आ चुके हैं। इससे पहले शनिवार को अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती 2 बच्चे कोरोना संक्रमण का शिकार हो गए थे। इनमें 45 दिन के एक बच्चे को कोरोना वार्ड के आईसीयू में भेजा गया था जहां उसकी मौत हो गई थी। यह भारत में कोरोना संक्रमित सबसे छोटा मरीज था जिसकी मौत हो गयी। इस बच्चे के पिता भी कोरोना संक्रमण की चपेट में चुके हैं। सफदरजंग अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की दो डॉक्टरों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इससे पहले भी अस्पताल के दो अन्य डॉक्टरों में कोरोना की पुष्टि हुई थी। इस तरह अस्पताल के 4 डॉक्टर अब तक कोरोना का शिकार हो चुके हैं।
चिंता:6 बच्चे वेंटिलेटर पर, कोरोना जांच के लिए लिया गया है सैंपल
अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती एक दर्जन से ज्यादा बच्चों में 7 ऐसे हैं जो वेंटिलेटर पर हैं। डेढ़ महीने के बच्चे की मौत के बाद अन्य बच्चों के सैम्पल जांच के लिए भेजे गए हैं। अस्पताल में काम करने वाले 3 रेजिडेंट डॉक्टरों के कोरोना पीड़ित होने के बाद छात्रावास में रहने वाले अन्य डॉक्टरों को भी संक्रमण का डर होने लगा हैं इस वजह से संक्रमित डॉक्टरों को छात्रावास से निकलकर कोरोना वार्ड में शिफ्ट कराया गया है। इनके संपर्क में आने वाले कई डॉक्टर संदिग्ध हैं। इसे देखते हुए अस्पताल के मेस को बंद कर दिया गया है।
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