जो बीमारी और संकोच से राहत केंद्र तक नहीं पहुंच रहे, उन तक ड्यूटी खत्म करने के बाद राशन पहुंचा रहे 4 अफसर, 10 दिनों में बांट चुके 5000 किट
(शेखर घोष)लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को दिल्ली सरकार सहित रेलवे और कई निजी संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर राशन बांट रही हैं। यहां तक कि भोजन बनाकर भी वितरित किए जा रहे हैं। ऐसी मुश्किल घड़ी में दिल्ली सरकार के दक्षिण जिला में राजस्व विभाग के चार अधिकारियों ने मदद करने की ठानी। ये अधिकारी अब तक मिलकर करीब 5000 लोगों तक राशन पहुंचा चुके हैं। खास बात यह है कि ये उन तक राशन पहुंचा रहे हैं जिन्हें जरूरत तो है मगर अधिक उम्र, बीमारी और विकलांगता की वजह से अन्य जगहों पर मिलने वाली राहत सामग्री को लेने नहीं पहुंच पाते। ऐसे लोगों का पता लगाकर ये अधिकारी उन तक राशन पहुंचा रहे हैं। ये अधिकारी हैं-डीएम साउथ डा. बीएम मिश्रा, एडीएम साउथ अरुण गुप्ता, एसडीएम मेहरौली सोनालिका जीवानी और एसडीएम साकेत अंकिता मिश्रा।
क्षेत्र के बीट अफसरों, स्थानीय लोगों से ऐसे जरूरतमंदों की करते हैं तलाश
एडीएम साउथ अरुण गुप्ता ने बताया कि सरकार के द्वारा बांटे जा रहे भोजन को लेकर एयर इंडिया में तैनात मेरे परिचित एक अधिकारी ने मुझसे संपर्क कर दो ऐसे परिवार की सूचना देकर भोजन उपलब्ध करवाने की गुजारिश की। पर इसमें मेरे हाथ बंधे थे क्योंकि हमारे पास दो समय बना खाना बंटने के लिए आता था। उनके घर तक यहां आने वाला भोजन पहुंचाना ठीक नहीं था। ऐसे में शाम को हम खुद अपने कर्मचारियों के साथ आटा, चावल, दाल और अन्य सामान लेकर सरकारी गाड़ी से घर पंहुचे।
दो लोगों से मुलाकात के बाद ही मैं सोचने पर विवश हो गया
दो लोगों से मुलाकात के बाद वे सोचने को विवश हुए और अपने डीएम और एसडीएम के साथ इस पर मीटिंग ली और तुरंत तय किया कि दक्षिण जिले में ऐसे लोगों की पहचान कर उनके पास भोजन पंहुचाया जाए। इसके लिए जब क्षेत्र के लोगों व बीट अफसरों से अकेले रहने वाले वृद्धों, विकलांगों, बेसहारा महिलाओं का पता लगाना शुरू किया तो पहले ही दिन उन्हें 1500 से अधिक लोगों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद चारों अधिकारी मिलकर पांच किलो आटा, 5 किलो चावल, 3किलो चीनी, 2किलो दाल, एक लीटर रिफाइंड ऑयल, टूथ पेस्ट, दो कपड़े और दो नहाने के साबुन का 2000 किट तैयार कर बांटे।
ड्यूटी के बाद स्टाफ को लोगों को पता देकर समान बांटने की ड्यूटी
ड्यूटी के खत्म होने के बाद अपने स्टाफ को उनकी स्वेच्छा से इस नेक काम में ऐेसे लोगों को पता देकर समान बांटने की ड्यूटी लगाई। इसके बाद चारों अधिकारियों ने अपने संपर्क में आने वाले बड़े अधिकारियों, एनजीओ से संपर्क कर फंड लेकर 5000 राशन का किट तैयार कर 11 दिनों में बांटे।
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