फीस नहीं चुकाने पर भी ऑनलाइन क्लास सुविधा नहीं रोक सकेंगे स्कूल
प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई कराने वाले अभिभावकों के लिए राहत का फैसला दिल्ली सरकार ने लिया है। दिल्ली सरकार ने आदेश जारी कर कहा कि कोई भी प्राइवेट स्कूल चाहे वो सरकारी जमीन पर हों या निजी जमीन पर चलाए जा रहे हों, वो ट्यूशन फीस के अलावा किसी भी तरह का चार्ज फीस में नहीं मांग सकेंगे। वे ट्यूशन फीस भी एक महीने का ही लेंगे। इसके अलावा एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, ट्रांसपोर्ट चार्ज, कंप्यूटर या स्मार्ट क्लास चार्ज सहित अन्य किसी का चार्ज नहीं वसूलेंगे। अगर कोई अभिभावक इस लॉक डाउन में आर्थिक दशा खराब होने या किसी वजह से फीस नहीं दे पा रहा है तो भी उसकी ऑनलाइन क्लास या असाइनमेंट स्कूल नहीं रोकेंगे।
आदेश नहीं मानने वालों पर होगी कार्रवाई
शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि आदेश नहीं मानने वाले स्कूलों के खिलाफ दिल्ली शिक्षा अधिनियम व नियम 1973 के साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी। स्कूल कोई कंपनी नहीं बल्कि ट्रस्ट चलाती है, जिसका काम मुनाफा कमाना नहीं। ऐसे समय में जब देश कोरोना महामारी की आपदा से जूझ रहा है वो पैरेंट्स को किसी तरह की दिक्कत पैदा न करें। स्कूल के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ चाहे वो स्थायी, अस्थायी, कांट्रैक्ट पर हों उन्हें समय पर और पूरा वेतन दें। अगर स्कूल के पास वेतन देने के लिए पैसे की कमी आती है तो अपने पैरेंट संस्था से पैसे लें।
स्कूल एसोसिएशन ने फैसले का स्वागत किया
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के चेयरमैन आरसी जैन ने दिल्ली सरकार के आदेश का स्वागत किया है। जैन ने कहा है कि जो चारों तरफ से डिमांड चली आ रही थी कि तीन महीने की फीस नहीं लेनी चाहिए। उस पर विराम लग गया है। स्कूल में स्टाफ, टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की सैलरी देनी होती है। ऐसे में फीस नहीं लेंगे तो वेतन कहां से देंगे। अब सरकार ने आदेश दिया है कि ट्यूशन फीस लेंगे तो एक तरफ पैरेंट्स को राहत मिलेगी तो दूसरी तरफ स्कूलों को फीस मिलेगी।
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