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कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा तकनीक अपनाएगी दिल्ली सरकार

कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए एक सुखद खबर है। दिल्ली में कोरोना का इलाज प्लाज्मा तकनीक से करने को केंद्र सरकार से अनुमति मिल गई है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने इसे आशा की किरण बताते हुए कहा, केंद्र सरकार से दो दिन पहले अनुमति मिल गई है। दिल्ली सरकार के डॉक्टर अगले 3-4 दिन में ट्रायल शुरू करेंगे। भगवान से प्रार्थना है कि दिल्ली के साथ पहले से जुटे केरल और महाराष्ट्र को भी इसमें सफलता मिल जाए। ट्रायल सफल होने पर गंभीर मरीजों को बचा पाएंगे। हालांकि ये बताना जरूरी है कि अभी सिर्फ ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल होगा। कोरोना से मुक्ति तो इसकी वैक्सीन खोजने के बाद ही मिलेगी।
सीएम ने बताया कि जिस मरीज को एक बार कोरोना हो जाता है, उसके ठीक होने पर शरीर में एंटीबॉडी डेवलप होते हैं। वो उस मरीज को ठीक करने में मदद करते हैं। ऐसे व्यक्ति का एक यूनिट रक्त लेकर उसमें से प्लाज्मा निकाला जाता है और उसे दूसरे मरीज में डाला जाता है। तब मरीज के अंदर ठीक करने वाले एंटीबॉडीज डेवलप हो जाते हैं। सीएम ने कहा कि मीडिया या किसी आमजन को कहीं ऐसा व्यक्ति मिलता है जिसे खाना या रहने के सेंटर का पता नहीं तो सरकार के ध्यान में लाएं। सरकार इंतजाम करेगी।

दावा: मार्च के आखिरी सप्ताह में एडमिट बहुत से लोग हुए ठीक
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मार्च के आखिरी सप्ताह में भर्ती हुए कोरोना पॉजिटिव मरीजों के बड़ी संख्या में ठीक होने की खबर दी है। उन्होंने कहा है कि ये बहुत खुशी की बात है कि बड़ी संख्या में मरीज ठीक होकर घर लौट रहे हैं। मुझे पता चला है कि आज भी बहुत से लोग ठीक हुए हैं। आने वाले तीन-चार दिन में बहुत सारे मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलेगी। उन्होंने यह उम्मीद जताई की सरकार की ओर से प्लाज्मा तकनीकी फिलहाल ट्रायल के दौर में है इसलिए फिलहाल किसी भी प्रकार का दावा नहीं किया जा सकता। इधर, लगातार कंटेनमेंट जोन में सेनिटाइजेशन का काम तेजी किया जा रहा है।

सफाई: कंटेनमेंट जोन में सिर्फ जिनमें लक्षण उनका ही सैंपल लेना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक 57 कंटेनमेंट जोन बनाए हैं। सबसे पहले वहां आवश्यक वस्तुओं का इंतजाम करते हैं और फिर ऑपरेशन शील्ड में तय कार्यक्रम अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि सर्वे 100 फीसदी घरों का करके पता लगाते हैं कि लक्षण किसी व्यक्ति में तो नहीं। सबके घर दिल्ली सरकार की टीम जाती है जो पूछती है कि बीमार, सांस की दिक्कत या कोरोना के लक्षण पर बात करते हैं। जहां अभी सर्वे नहीं हुआ है तो वहां होगा। जिनमें लक्षण मिलते हैं या मिलेंगे उनका टेस्ट सैंपल लिया जाता है। दिलशाद गार्डन, वसुंधरा एंक्लेव और खिचड़ीपुर में कंटेनमेंट जोन बनाकर सील किए जाने के बाद से कोई केस नहीं आया है।



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Delhi government to adopt plasma technology to treat corona infected patients


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